श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics - (PDF)

 श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics - Hanumanji Aarti Lyrics

श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics - (PDF)
श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics - (PDF)


Shree Hanuman Chalisa Lyrics Was Written By Tulsidas. It is one of the most powerful Chalisa of Hinduism. In this post, we are going to tell you some benefits of chanting Hanuman Chalisa and lyrics of this song in various language. Hanuman Chalisa pdf are also uploaded on this site.


Spritual Benefits Of Chanting Hanuman Chalisa Lyrics

When to chant Hanuman Chalisa

Hanuman Chalisa can be recited both in the morning and evening. It takes not more than 10 minutes to read this beautiful hymn. It is said that each verse or chaupai has its own significance. If one is unable to read all 40 verses, then one can choose to recite only certain ones to suit their needs.


It is believed among Hindus that reciting Hanuman Chalisa calls upon Hanuman’s involvement in critical problems and helps wards off evil spirits and negative energy.

Recital of the Hanuman Chalisa helps reduce the effects of Sade Sati and helps those suffering due to Saturn if they read Hanuman Chalisa on Saturday for peace and prosperity.

Hanuman Chalisa can help those troubled with nightmares if they place the Chalisa under their pillow before sleeping.

More than anything, dedicated recitals of Hanuman Chalisa can one overcome the trauma of bad experiences.

Reading Hanuman Chalisa is beneficial if one wants to get rid of the karmic effects of the bad deeds done in the past.

Those who read Hanuman Chalisa with utmost dedication invite the divine protection of Lord Hanuman who removes obstacles in our endeavours.

Those suffering from stress should read Hanuman Chalisa to feel relaxed and in control of life.

It is believed that Lord Hanuman can prevent accidents and ensure a successful trip, which is why many people have idols of Hanuman in their cars.

For those seeking enlightenment, reading Hanuman Chalisa can help gain wisdom and spiritual knowledge.

Reciting Hanuman Chalisa helps people who have been distracted by a bad company. It helps in the reformation of those fallen prey to objectionable habits.

It eliminates disagreements and promotes unanimity and contentment. Reciting Hanuman Chalisa promotes harmony and eliminates unnecessary arguments by making one aware


  • For removal of bad karma- first opening verse
  • Wisdom and strength – second opening verse
  • Attainment of divine knowledge – 1ST verse
  • Removal of bad company and habits – 3rd verse
  • Cultivation of devotion – verses 7 and 8
  • Protection from poisons and snake bites – 11th verse
  • Removes misunderstanding between sons and daughters – 12th verse
  • To gain fame – 13th – 15th verse
  • Recovery of lost status, promotion in jobs- 16th -17th verse
  • Remove obstacles; accomplish difficult tasks – 20th verse
  • Protection from adverse planetary influences – 22nd verse
  • Protection from black magic and evil spirits – 24th verse
  • To achieve good health -25th verse
  • Liberation from crisis – 26th verse
  • Fulfillment of desires – 27th – 28th verses
  • Victory over enemies – 30th verse
  • Occult powers and wealth – 31st verse
  • To follow ethics and have a fulfilling life – 32nd -35th verses,
  • For mental peace – 36th verse
  • For grace of Lord Hanuman – 37th verse


श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi and It's Meaning


दोहा :-

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

अर्थ :-

श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्‍बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कर दीजिए।


चौपाई :-

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

अर्थ :-

हनुमान जी की जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।


चौपाई :-

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

अर्थ :-

हे पवनसुत अंजनीनन्दन! श्रीरामदूत! आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है ।

 

चौपाई :-

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।

अर्थ :-

हे महावीर बजरंगबली! आप तो विशेष पराक्रमवाले है । आप दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धिवालों के सहायक है ।


चौपाई :-

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।

अर्थ :-

आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभीत हैं ।


चौपाई :-

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेउ साजै॥

अर्थ :-

आपके हाथमें बज्र और ध्वजा हैं तथा कांधे पर मूंज जनेऊ की शोभा है।


चौपाई :-

शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

अर्थ :-

हे शंकर के अवतार, हे केशरी-नन्दन, आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।


चौपाई :-

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।

अर्थ :-

आप प्रकाण्ड विद्यानिधान हैं, गुणवान और अत्यंत कार्यकुशल होकर श्रीराम-काज करने के लिए उत्सुक रहतें हैं ।


चौपाई :-

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

अर्थ :-

आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनन्द-रस लेते हैं । श्रीराम सीता और लक्ष्मण आपके हृदयमें बसते हैं।


चौपाई :-

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

अर्थ :-

आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।


चौपाई :-

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।

अर्थ :-

आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्‍देश्यों को सफल बनाया।


चौपाई :-

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

अर्थ :-

आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।


चौपाई :-

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

अर्थ :-

हे पवनसुत! श्रीरामचंद्रजी ने आपकी बहुत प्रंशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे भाई हो।

 

चौपाई :-

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

अर्थ :-

श्रीराम ने आपको यह कहकर ह्रदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजार-मुखसे सराहनीय है ।


चौपाई :-

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

अर्थ :-

श्रीसनक, श्रीसनातन, श्रीसनन्दन, श्रीसनत्कुमार आदि मुनि, ब्रम्हा आदि देवता, नारदजी, सरस्वतीजी, शेषनागजी आदि आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते ।


चौपाई :-

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

अर्थ :-

यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि, विद्वान, पंडित, या कोई भी आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।


चौपाई :-

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

अर्थ :-

आपने सुग्रीवजी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने ।


चौपाई :-

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

अर्थ :-

आपके उपदेश का विभीषण ने पूर्णत: पालन किया, इसी कारण वे लंका के राजा बनें, इसको सब संसार जानता है ।


चौपाई :-

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

अर्थ :-

जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।


चौपाई :-

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

अर्थ :-

आपने श्रीरामचंद्रजी की अंगूठी मूंह में रखकर समुद्र को पार किया परन्तु आपके लिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है ।


चौपाई :-

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

अर्थ :-

संसार में जितने भी कठीन से कठीन काम हैं, वे सभी आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं ।


चौपाई :-

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

अर्थ :-

श्री रामचंद्रजी के द्वार के आप रखवाले हैं , जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता । (अर्थात बिना हनुमान जी को प्रसन्न किये राम जी को नहीं पाया जा सकता)


चौपाई :-

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।

अर्थ :-

जो आप में शरण लेते हैं वे सभी खुशी का आनंद लेते हैं। यदि आप रक्षक हैं, तो डरने के लिए क्या है?


चौपाई :-

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।

अर्थ :-

आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।


चौपाई :-

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै।।

अर्थ :-

आपका ‘महावीर’ हनुमानजी का नाम सुनकर भूत-पिसाच आदि दुष्ट आत्माएँ पास भी नहीं आ सकती ।


चौपाई :-

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

अर्थ :-

आपका निरंतर जप करने से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और सब कष्ट दूर हो जाते हैं।


चौपाई :-

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

अर्थ :-

हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।


चौपाई :-

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।

अर्थ :-

तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।


चौपाई :-

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।

अर्थ :-

जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।


चौपाई :-

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।

अर्थ :-

चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।


चौपाई :-

साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अर्थ :-

हे श्री राम के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।


चौपाई :-

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

अर्थ :-

आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है। (आठ सिद्धियां –

1.) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।

2.) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।

3.) गरिमा- जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।

4.) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।

5.) प्राप्ति- जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।

6.) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है।

7.) ईशित्व- जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है।

8.) वशित्व- जिससे दूसरों को वश में किया जाता है।)


चौपाई :-

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

अर्थ :-

आप निरन्तर श्री रघुनाथजी की शरण में रहते हैं, जिससे आपके पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम-नाम रुपी औषधी है ।


चौपाई :-

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अर्थ :-

आपका भजन करने से श्रीरामजी प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दु:ख दूर होते हैं।


चौपाई :-

अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

अर्थ :-

अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।


चौपाई :-

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

अर्थ :-

हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।


चौपाई :-

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

अर्थ :-

हे वीर हनुमानजी ! जो आपका स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीडा मिट जाती हैं।


चौपाई :-

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

अर्थ :-

हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।


चौपाई :-

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।

अर्थ :-

जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।


चौपाई :-

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

अर्थ :-

भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।


चौपाई :-

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

अर्थ :-

हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।


दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

अर्थ :-

हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in English and It's Meaning


COUPLET


Sri Guru Charan Saroj Raj, Nij Mann Mukuru Sudhaari.

Barnaun Raghuvar Bimal Jasu, Jo Daayaku Phal Chaari.


Having polished the mirror of my heart with the dust of my Guru's lotus feet, I recite the divine fame of the greatest king of Raghukul dynasty, which bestows us with the fruit of all the four efforts.


Buddhiheen Tanu Janike, Sumiraun Pawan-Kumar.

Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikaar.


Knowing that this mind of mine has less intelligence, I remember the ‘Son of Wind’ who, granting me strength, wisdom and all kinds of knowledge, removes all my suffering and shortcomings.

QUATRAIN


Jai Hanuman Gyan Gunn Sagar. Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar.

Ramdoot Atulit Baldhama. Anjani-Putra Pawansut Naama.


Victory to Lord Hanuman, the ocean of wisdom and virtue. Victory to the Lord who is supreme among the monkeys, illuminator of the three worlds.

You are Lord Rama's emissary,‌ the abode of matchless power, Mother Anjani's son and also popular as the ‘Son of the Wind’.


"Mahaveer Vikram Bajrangi. Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi.

Kanchan Baran Biraj Subesa. Kaanan Kundal Kunchit Kesa."


Great hero, You are as mighty as a thunderbolt. You remove evil intellect and are the companion of those having good ones.

Your skin is golden in color and You are adorned with beautiful clothes. You have adorning earrings in Your ears and Your hair is curly and thick. 


Haath Braj Au Dhwaja Biraaje. Kaandhe Moonj Janeu Saaje.

Shankar Suvan Kesarinandan. Tej Prataap Maha Jag Bandan.


In Your hands, shine a mace and a flag of righteousness. A sacred thread adorns Your right shoulder.

You are the embodiment of Lord Shiva and vanar-raj Kesari's son. There is no limit or end to Your glory, Your magnificence. The whole Universe worships You.


Vidyavaan Guni Ati Chaatur. Ram Kaaj Karibe Ko Aatur. 

Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya. Ram Lakhan Sita Mann Basiya.


You are the wisest of the wise, virtuous and (morally) clever. You are always eager to do Lord Rama's works.

You feel extremely delighted in listening to Lord Rama's doings and conduct. Lord Rama, Mother Sita, and Lord Laxmana dwell forever in Your heart.


Sukshma Roop Dhari Siyanhi Dikhawa. Bikat Roop Dhari Lanka Jarawa.

Bheem Roop Dhari Asura Sanghare. Ramchandra Ke Kaaj Sanware.


Taking the subtle form, You appeared in front of Mother Sita. And, taking the formidable form, You burnt the Lanka (Ravana's kingdom).

Taking the massive form (like that of Bheema), You slaughtered the demons. This is how, You completed Lord Rama's tasks, successfully.


Laaye Sanjeevan Lakhana Jiyaaye. Sri Raghuveer Harashi Urr Laaye.

Raghupati Keenhi Bahut Badai. Tum Mum Priya, Bhartahi Sum Bhai.


Bringing the magic-herb (sanjivani), You revived Lord Laxmana. Raghupati, Lord Rama praised You greatly and overflowing in gratitude, said that You are a dear brother to Him just as Bharat is.


Sahas Badan Tumharo Jas Gaave. Asa Kahi Sripati Kanth Lagaave. 

Sankaadik Brahmadi Munisa. Narad Sarad Sahit Aheesa.


Saying this, Lord Rama drew You to Himself and embraced you. Sages like Sanaka, Gods like Brahma and sages like Narada and even the thousand-mouthed serpent sing Your fame!

Sanak, Sanandan and the other Rishis and great saints; Brahma - the god, Narada, Saraswati - the Mother Divine and the King of serpents sing Your glory.


Jam Kuber Digpal Jahan Te. Kabi Kobid Kahi Sake Kahan Te. 

Tum Upkaar Sugreevahi Keenha. Ram Milaaye Raj-Pad Deenha.


Yama, Kubera and the guardians of the four quarters; poets and scholars - none can express Your glory.

You helped Sugriva by introducing Him to Lord Rama and regaining his crown. Therefore, You gave Him the Kingship (the dignity of being called a king).


Tumharo Mantra Bibhishan Maana. Lankeshwar Bhaye Sab Jag Jaana. 

Yug Sahastra Jojan Par Bhanu. Leelyo Taahi Madhur Phal Jaanu.


Likewise, complying with Your preachings, even Vibhishana became the King of Lanka.

You swallowed the sun, located thousands of miles away, mistaking it to be a sweet, red fruit! 


Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahi. Jaladhi Laandhi Gaye Achraj Naahi. 

Durgam Kaaj Jagat Ke Jete. Sugam Anugrah Tumhare Tete.


Keeping the ring in Your mouth, which was given to You by Lord Rama, you crossed over the Ocean, to no astonishment, whatsoever.

All difficult tasks of this world become easy, with Your grace.


Ram Duaare Tum Rakhvare. Hott Na Aagya Binu Paisare.

Sab Sukh Lahe Tumhari Sarna. Tum Rakshak Kahu Ko Dar Na.


You are the guardian at Lord Rama's door. Nobody can move forward without Your permission which means that Lord Rama's darshans (to get the sight of) are possible only with Your blessings.

Those who take refuge in You, find all the comforts and happiness. When we have a protector like You, we do not need to get scared of anybody or anything.


Aapan Tej Samharo Aape. Teeno Lok Haank Te Kaampe.

Bhoot Pishaach Nikat Nahi Aavein. Mahaveer Jab Naam Sunaave." 


You alone can withstand Your magnificence. All the three worlds start trembling at one roar of Yours.

O Mahaveer! No ghosts or evil spirits come near the ones who remember Your name. Therefore, just remembering Your name does everything!


Naase Rog Hare Sab Peera. Japat Nirantar Hanumat Beera. 

Sankat Te Hanuman Churave. Mann Kram Vachan Dhyaan Jo Laave.


O Hanuman! All diseases and all kinds of pain get eradicated when one recites or chants Your name. Therefore, chanting Your name regularly is considered to be very significant.

Whoever meditates upon or worships You with thought, word, and deed, gets freedom from all kinds of crisis and affliction.


Sab Par Ram Tapasvi Raja. Tin Ke Kaaj Sakal Tum Saaja.

Aur Manorath Jo Koi Laave. Soi Amit Jivan Phal Paave.


Lord Rama is the greatest Ascetic amongst all the Kings. But, it's only You who carried out all the tasks of Lord Sri Rama.

One who comes to You with any longing or a sincere desire obtains the abundance of the manifested fruit, which remains undying throughout life.


Chaaron Yug Partap Tumhara. Hai Parsidh Jagat Ujiyara. 

Saadhu-Sant Ke Tum Rakhvare. Asur Nikandan Ram Dulaare." 


Your splendor fills all the Four Ages. And, Your glory is renowned throughout the world.

You are the guardian of saints and sages; the destroyer of demons and adored by Lord Rama.


Ashta Siddhi Nau Nidhi Ke Daata. As Var Deen Janaki Mata. 

Ram Rasayan Tumhare Paasa. Sadaa Raho Raghupati Ke Daasa.


You have been blessed by Mother Janaki to give boon further, to the deserving ones, wherein You can grant the siddhis (eight different powers) and the nidhis (nine different kinds of wealth).

You have the essence of Ram bhakti, may you always remain the humble and devoted servant of Raghupati. 


Tumhare Bhajan Ram Ko Paave. Janam Janam Ke Dukh Bisraave. 

Antkaal Raghuvar Pur Jaayi. Jahan Janam Hari-Bhakt Kahayi.


When one sings Your praise, Your name, He gets to meet Lord Rama and finds relief from the sorrows of many lifetimes.

By your grace, one will go to the immortal abode of Lord Rama after death and remain devoted to Him. 


Aur Devta Chitta Na Dharai. Hanumat Sei Sarva Sukh Karai.

Sankat Kate, Mite Sab Peera. Jo Sumire Hanumat Balbeera. 


It is not needed to serve any other Deity or God. Service to Lord Hanuman gives all the comforts.

All troubles cease for the one who remembers the powerful lord, Lord Hanuman and all his pains also come to an end.


Jai Jai Jai Hanuman Gosain. Krupa Karahu Gurudev Ki Naai. 

Jo Sat Baar Paath Kar Koi. Chutahi Bandhi Maha Sukh Hoyi.


O Lord Hanuman! Praises and glory to you O mighty Lord, please bestow your grace as our Supreme Guru. 

One who recites this Chalisa a hundred times is released from all bondages and will attain great bliss.


Jo Yeh Padhe Hanuman Chalisa, Hoye Siddhi Saakhi Gaurisa.

Tulsidas Sada Hari Chera, Keeje Nath Hriday Mah Dera.


One who reads and recites this Hanuman Chalisa, all his works get accomplished. Lord Shiva, Himself, is the witness to it.

O Lord Hanuman, May I always remain a servant, a devotee to Lord Sri Ram, says Tulsidas. And, May You always reside in my heart.


COUPLET


Pawan Tanay Sankat Haran, Mangal Murti Roop.

Ram Lakhan Sita Sahit, Hriday Basahu Sur Bhoop.


O the Son of Wind, You are the destroyer of all sorrows. You are the embodiment of fortune and prosperity.

With Lord Rama, Laxmana and Mother Sita, dwell in my heart, always.


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Sanskrit and It's Meaning


हनुमान चालीसा


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥


बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥


॥चौपाई॥


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥


राम दूत अतुलित बल धामा ।

अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥


महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥


कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥


सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥


बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥


लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥


रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥


सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥


तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥


जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥


दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥


राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥


सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥


आपन तेज सह्मारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥


भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥


नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥


सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥


सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥


और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥


चारों जुग परताप तुह्मारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥


साधु सन्त के तुम रखवारे ।

असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥


अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥


राम रसायन तुह्मरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥


तुह्मरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥


अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥


और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥


सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥


जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥


जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥


॥दोहा॥


पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Kannada and It's Meaning


ದೋಹಾ

ಶ್ರೀ ಗುರು ಚರಣ ಸರೋಜ ರಜ ನಿಜಮನ ಮುಕುರ ಸುಧಾರಿ |

ವರಣೌ ರಘುವರ ವಿಮಲಯಶ ಜೋ ದಾಯಕ ಫಲಚಾರಿ ‖

ಬುದ್ಧಿಹೀನ ತನುಜಾನಿಕೈ ಸುಮಿರೌ ಪವನ ಕುಮಾರ |

ಬಲ ಬುದ್ಧಿ ವಿದ್ಯಾ ದೇಹು ಮೋಹಿ ಹರಹು ಕಲೇಶ ವಿಕಾರ ‖


ಧ್ಯಾನಮ್

ಗೋಷ್ಪದೀಕೃತ ವಾರಾಶಿಂ ಮಶಕೀಕೃತ ರಾಕ್ಷಸಮ್ |

ರಾಮಾಯಣ ಮಹಾಮಾಲಾ ರತ್ನಂ ವಂದೇ-(ಅ)ನಿಲಾತ್ಮಜಮ್ ‖

ಯತ್ರ ಯತ್ರ ರಘುನಾಥ ಕೀರ್ತನಂ ತತ್ರ ತತ್ರ ಕೃತಮಸ್ತಕಾಂಜಲಿಮ್ |

ಭಾಷ್ಪವಾರಿ ಪರಿಪೂರ್ಣ ಲೋಚನಂ ಮಾರುತಿಂ ನಮತ ರಾಕ್ಷಸಾಂತಕಮ್ ‖


ಚೌಪಾಈ

ಜಯ ಹನುಮಾನ ಜ್ಞಾನ ಗುಣ ಸಾಗರ |

ಜಯ ಕಪೀಶ ತಿಹು ಲೋಕ ಉಜಾಗರ ‖ 1 ‖


ರಾಮದೂತ ಅತುಲಿತ ಬಲಧಾಮಾ |

ಅಂಜನಿ ಪುತ್ರ ಪವನಸುತ ನಾಮಾ ‖ 2 ‖


ಮಹಾವೀರ ವಿಕ್ರಮ ಬಜರಂಗೀ |

ಕುಮತಿ ನಿವಾರ ಸುಮತಿ ಕೇ ಸಂಗೀ ‖3 ‖


ಕಂಚನ ವರಣ ವಿರಾಜ ಸುವೇಶಾ |

ಕಾನನ ಕುಂಡಲ ಕುಂಚಿತ ಕೇಶಾ ‖ 4 ‖


ಹಾಥವಜ್ರ ಔ ಧ್ವಜಾ ವಿರಾಜೈ |

ಕಾಂಥೇ ಮೂಂಜ ಜನೇವೂ ಸಾಜೈ ‖ 5‖


ಶಂಕರ ಸುವನ ಕೇಸರೀ ನಂದನ |

ತೇಜ ಪ್ರತಾಪ ಮಹಾಜಗ ವಂದನ ‖ 6 ‖


ವಿದ್ಯಾವಾನ ಗುಣೀ ಅತಿ ಚಾತುರ |

ರಾಮ ಕಾಜ ಕರಿವೇ ಕೋ ಆತುರ ‖ 7 ‖


ಪ್ರಭು ಚರಿತ್ರ ಸುನಿವೇ ಕೋ ರಸಿಯಾ |

ರಾಮಲಖನ ಸೀತಾ ಮನ ಬಸಿಯಾ ‖ 8‖


ಸೂಕ್ಷ್ಮ ರೂಪಧರಿ ಸಿಯಹಿ ದಿಖಾವಾ |

ವಿಕಟ ರೂಪಧರಿ ಲಂಕ ಜಲಾವಾ ‖ 9 ‖


ಭೀಮ ರೂಪಧರಿ ಅಸುರ ಸಂಹಾರೇ |

ರಾಮಚಂದ್ರ ಕೇ ಕಾಜ ಸಂವಾರೇ ‖ 10 ‖


ಲಾಯ ಸಂಜೀವನ ಲಖನ ಜಿಯಾಯೇ |

ಶ್ರೀ ರಘುವೀರ ಹರಷಿ ಉರಲಾಯೇ ‖ 11 ‖


ರಘುಪತಿ ಕೀನ್ಹೀ ಬಹುತ ಬಡಾಯೀ |

ತುಮ ಮಮ ಪ್ರಿಯ ಭರತ ಸಮ ಭಾಯೀ ‖ 12 ‖


ಸಹಸ್ರ ವದನ ತುಮ್ಹರೋ ಯಶಗಾವೈ |

ಅಸ ಕಹಿ ಶ್ರೀಪತಿ ಕಂಠ ಲಗಾವೈ ‖ 13 ‖


ಸನಕಾದಿಕ ಬ್ರಹ್ಮಾದಿ ಮುನೀಶಾ |

ನಾರದ ಶಾರದ ಸಹಿತ ಅಹೀಶಾ ‖ 14 ‖


ಯಮ ಕುಬೇರ ದಿಗಪಾಲ ಜಹಾಂ ತೇ |

ಕವಿ ಕೋವಿದ ಕಹಿ ಸಕೇ ಕಹಾಂ ತೇ ‖ 15 ‖


ತುಮ ಉಪಕಾರ ಸುಗ್ರೀವಹಿ ಕೀನ್ಹಾ |

ರಾಮ ಮಿಲಾಯ ರಾಜಪದ ದೀನ್ಹಾ ‖ 16 ‖


ತುಮ್ಹರೋ ಮಂತ್ರ ವಿಭೀಷಣ ಮಾನಾ |

ಲಂಕೇಶ್ವರ ಭಯೇ ಸಬ ಜಗ ಜಾನಾ ‖ 17 ‖


ಯುಗ ಸಹಸ್ರ ಯೋಜನ ಪರ ಭಾನೂ |

ಲೀಲ್ಯೋ ತಾಹಿ ಮಧುರ ಫಲ ಜಾನೂ ‖ 18 ‖


ಪ್ರಭು ಮುದ್ರಿಕಾ ಮೇಲಿ ಮುಖ ಮಾಹೀ |

ಜಲಧಿ ಲಾಂಘಿ ಗಯೇ ಅಚರಜ ನಾಹೀ ‖ 19 ‖


ದುರ್ಗಮ ಕಾಜ ಜಗತ ಕೇ ಜೇತೇ |

ಸುಗಮ ಅನುಗ್ರಹ ತುಮ್ಹರೇ ತೇತೇ ‖ 20 ‖


ರಾಮ ದುಆರೇ ತುಮ ರಖವಾರೇ |

ಹೋತ ನ ಆಜ್ಞಾ ಬಿನು ಪೈಸಾರೇ ‖ 21 ‖


ಸಬ ಸುಖ ಲಹೈ ತುಮ್ಹಾರೀ ಶರಣಾ |

ತುಮ ರಕ್ಷಕ ಕಾಹೂ ಕೋ ಡರ ನಾ ‖ 22 ‖


ಆಪನ ತೇಜ ಸಮ್ಹಾರೋ ಆಪೈ |

ತೀನೋಂ ಲೋಕ ಹಾಂಕ ತೇ ಕಾಂಪೈ ‖ 23 ‖


ಭೂತ ಪಿಶಾಚ ನಿಕಟ ನಹಿ ಆವೈ |

ಮಹವೀರ ಜಬ ನಾಮ ಸುನಾವೈ ‖ 24 ‖


ನಾಸೈ ರೋಗ ಹರೈ ಸಬ ಪೀರಾ |

ಜಪತ ನಿರಂತರ ಹನುಮತ ವೀರಾ ‖ 25 ‖


ಸಂಕಟ ಸೇ ಹನುಮಾನ ಛುಡಾವೈ |

ಮನ ಕ್ರಮ ವಚನ ಧ್ಯಾನ ಜೋ ಲಾವೈ ‖ 26 ‖


ಸಬ ಪರ ರಾಮ ತಪಸ್ವೀ ರಾಜಾ |

ತಿನಕೇ ಕಾಜ ಸಕಲ ತುಮ ಸಾಜಾ ‖ 27 ‖


ಔರ ಮನೋರಧ ಜೋ ಕೋಯಿ ಲಾವೈ |

ತಾಸು ಅಮಿತ ಜೀವನ ಫಲ ಪಾವೈ ‖ 28 ‖


ಚಾರೋ ಯುಗ ಪ್ರತಾಪ ತುಮ್ಹಾರಾ |

ಹೈ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ಜಗತ ಉಜಿಯಾರಾ ‖ 29 ‖


ಸಾಧು ಸಂತ ಕೇ ತುಮ ರಖವಾರೇ |

ಅಸುರ ನಿಕಂದನ ರಾಮ ದುಲಾರೇ ‖ 30 ‖


ಅಷ್ಠಸಿದ್ಧಿ ನವ ನಿಧಿ ಕೇ ದಾತಾ |

ಅಸ ವರ ದೀನ್ಹ ಜಾನಕೀ ಮಾತಾ ‖ 31 ‖


ರಾಮ ರಸಾಯನ ತುಮ್ಹಾರೇ ಪಾಸಾ |

ಸದಾ ರಹೋ ರಘುಪತಿ ಕೇ ದಾಸಾ ‖ 32 ‖


ತುಮ್ಹರೇ ಭಜನ ರಾಮಕೋ ಪಾವೈ |

ಜನ್ಮ ಜನ್ಮ ಕೇ ದುಖ ಬಿಸರಾವೈ ‖ 33 ‖


ಅಂತ ಕಾಲ ರಘುಪತಿ ಪುರಜಾಯೀ |

ಜಹಾಂ ಜನ್ಮ ಹರಿಭಕ್ತ ಕಹಾಯೀ ‖ 34 ‖


ಔರ ದೇವತಾ ಚಿತ್ತ ನ ಧರಯೀ |

ಹನುಮತ ಸೇಯಿ ಸರ್ವ ಸುಖ ಕರಯೀ ‖ 35 ‖


ಸಂಕಟ ಕ(ಹ)ಟೈ ಮಿಟೈ ಸಬ ಪೀರಾ |

ಜೋ ಸುಮಿರೈ ಹನುಮತ ಬಲ ವೀರಾ ‖ 36 ‖


ಜೈ ಜೈ ಜೈ ಹನುಮಾನ ಗೋಸಾಯೀ |

ಕೃಪಾ ಕರಹು ಗುರುದೇವ ಕೀ ನಾಯೀ ‖ 37 ‖


ಜೋ ಶತ ವಾರ ಪಾಠ ಕರ ಕೋಯೀ |

ಛೂಟಹಿ ಬಂದಿ ಮಹಾ ಸುಖ ಹೋಯೀ ‖ 38 ‖


ಜೋ ಯಹ ಪಡೈ ಹನುಮಾನ ಚಾಲೀಸಾ |

ಹೋಯ ಸಿದ್ಧಿ ಸಾಖೀ ಗೌರೀಶಾ ‖ 39 ‖


ತುಲಸೀದಾಸ ಸದಾ ಹರಿ ಚೇರಾ |

ಕೀಜೈ ನಾಥ ಹೃದಯ ಮಹ ಡೇರಾ ‖ 40 ‖


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Telugu and It's Meaning


దోహా

శ్రీ గురు చరణ సరోజ రజ నిజమన ముకుర సుధారి |

వరణౌ రఘువర విమలయశ జో దాయక ఫలచారి ‖

బుద్ధిహీన తనుజానికై సుమిరౌ పవన కుమార |

బల బుద్ధి విద్యా దేహు మోహి హరహు కలేశ వికార ‖


ధ్యానమ్

గోష్పదీకృత వారాశిం మశకీకృత రాక్షసమ్ |

రామాయణ మహామాలా రత్నం వందే-(అ)నిలాత్మజమ్ ‖

యత్ర యత్ర రఘునాథ కీర్తనం తత్ర తత్ర కృతమస్తకాంజలిమ్ |

భాష్పవారి పరిపూర్ణ లోచనం మారుతిం నమత రాక్షసాంతకమ్ ‖


చౌపాఈ

జయ హనుమాన జ్ఞాన గుణ సాగర |

జయ కపీశ తిహు లోక ఉజాగర ‖ 1 ‖


రామదూత అతులిత బలధామా |

అంజని పుత్ర పవనసుత నామా ‖ 2 ‖


మహావీర విక్రమ బజరంగీ |

కుమతి నివార సుమతి కే సంగీ ‖3 ‖


కంచన వరణ విరాజ సువేశా |

కానన కుండల కుంచిత కేశా ‖ 4 ‖


హాథవజ్ర ఔ ధ్వజా విరాజై |

కాంథే మూంజ జనేవూ సాజై ‖ 5‖


శంకర సువన కేసరీ నందన |

తేజ ప్రతాప మహాజగ వందన ‖ 6 ‖


విద్యావాన గుణీ అతి చాతుర |

రామ కాజ కరివే కో ఆతుర ‖ 7 ‖


ప్రభు చరిత్ర సునివే కో రసియా |

రామలఖన సీతా మన బసియా ‖ 8‖


సూక్ష్మ రూపధరి సియహి దిఖావా |

వికట రూపధరి లంక జలావా ‖ 9 ‖


భీమ రూపధరి అసుర సంహారే |

రామచంద్ర కే కాజ సంవారే ‖ 10 ‖


లాయ సంజీవన లఖన జియాయే |

శ్రీ రఘువీర హరషి ఉరలాయే ‖ 11 ‖


రఘుపతి కీన్హీ బహుత బడాయీ |

తుమ మమ ప్రియ భరత సమ భాయీ ‖ 12 ‖


సహస్ర వదన తుమ్హరో యశగావై |

అస కహి శ్రీపతి కంఠ లగావై ‖ 13 ‖


సనకాదిక బ్రహ్మాది మునీశా |

నారద శారద సహిత అహీశా ‖ 14 ‖


యమ కుబేర దిగపాల జహాం తే |

కవి కోవిద కహి సకే కహాం తే ‖ 15 ‖


తుమ ఉపకార సుగ్రీవహి కీన్హా |

రామ మిలాయ రాజపద దీన్హా ‖ 16 ‖


తుమ్హరో మంత్ర విభీషణ మానా |

లంకేశ్వర భయే సబ జగ జానా ‖ 17 ‖


యుగ సహస్ర యోజన పర భానూ |

లీల్యో తాహి మధుర ఫల జానూ ‖ 18 ‖


ప్రభు ముద్రికా మేలి ముఖ మాహీ |

జలధి లాంఘి గయే అచరజ నాహీ ‖ 19 ‖


దుర్గమ కాజ జగత కే జేతే |

సుగమ అనుగ్రహ తుమ్హరే తేతే ‖ 20 ‖


రామ దుఆరే తుమ రఖవారే |

హోత న ఆజ్ఞా బిను పైసారే ‖ 21 ‖


సబ సుఖ లహై తుమ్హారీ శరణా |

తుమ రక్షక కాహూ కో డర నా ‖ 22 ‖


ఆపన తేజ సమ్హారో ఆపై |

తీనోం లోక హాంక తే కాంపై ‖ 23 ‖


భూత పిశాచ నికట నహి ఆవై |

మహవీర జబ నామ సునావై ‖ 24 ‖


నాసై రోగ హరై సబ పీరా |

జపత నిరంతర హనుమత వీరా ‖ 25 ‖


సంకట సే హనుమాన ఛుడావై |

మన క్రమ వచన ధ్యాన జో లావై ‖ 26 ‖


సబ పర రామ తపస్వీ రాజా |

తినకే కాజ సకల తుమ సాజా ‖ 27 ‖


ఔర మనోరధ జో కోయి లావై |

తాసు అమిత జీవన ఫల పావై ‖ 28 ‖


చారో యుగ ప్రతాప తుమ్హారా |

హై ప్రసిద్ధ జగత ఉజియారా ‖ 29 ‖


సాధు సంత కే తుమ రఖవారే |

అసుర నికందన రామ దులారే ‖ 30 ‖


అష్ఠసిద్ధి నవ నిధి కే దాతా |

అస వర దీన్హ జానకీ మాతా ‖ 31 ‖


రామ రసాయన తుమ్హారే పాసా |

సదా రహో రఘుపతి కే దాసా ‖ 32 ‖


తుమ్హరే భజన రామకో పావై |

జన్మ జన్మ కే దుఖ బిసరావై ‖ 33 ‖


అంత కాల రఘుపతి పురజాయీ |

జహాం జన్మ హరిభక్త కహాయీ ‖ 34 ‖


ఔర దేవతా చిత్త న ధరయీ |

హనుమత సేయి సర్వ సుఖ కరయీ ‖ 35 ‖


సంకట క(హ)టై మిటై సబ పీరా |

జో సుమిరై హనుమత బల వీరా ‖ 36 ‖


జై జై జై హనుమాన గోసాయీ |

కృపా కరహు గురుదేవ కీ నాయీ ‖ 37 ‖


జో శత వార పాఠ కర కోయీ |

ఛూటహి బంది మహా సుఖ హోయీ ‖ 38 ‖


జో యహ పడై హనుమాన చాలీసా |

హోయ సిద్ధి సాఖీ గౌరీశా ‖ 39 ‖


తులసీదాస సదా హరి చేరా |

కీజై నాథ హృదయ మహ డేరా ‖ 40 ‖


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Tamil and It's Meaning


தோ3ஹா

ஶ்ரீ கு3ரு சரண ஸரோஜ ரஜ நிஜமந முகுர ஸுதா4ரி |

வரணௌ ரகு4வர விமலயஶ ஜோ தா3யக ப2லசாரி ‖

பு3த்3தி4ஹீந தநுஜாநிகை ஸுமிரௌ பவந குமார |

ப3ல பு3த்3தி4 வித்3யா தே3ஹு மோஹி ஹரஹு கலேஶ விகார ‖


த்4யாநம்

கோ3ஷ்பதீ3க்ருத வாராஶிம் மஶகீக்ருத ராக்ஷஸம் |

ராமாயண மஹாமாலா ரத்நம் வந்தே3-(அ)நிலாத்மஜம் ‖

யத்ர யத்ர ரகு4நாத2 கீர்தநம் தத்ர தத்ர க்ருதமஸ்தகாஂஜலிம் |

பா4ஷ்பவாரி பரிபூர்ண லோசநம் மாருதிம் நமத ராக்ஷஸாந்தகம் ‖


சௌபாஈ

ஜய ஹநுமாந ஜ்ஞாந கு3ண ஸாக3ர |

ஜய கபீஶ திஹு லோக உஜாக3ர ‖ 1 ‖


ராமதூ3த அதுலித ப3லதா4மா |

அஂஜநி புத்ர பவநஸுத நாமா ‖ 2 ‖


மஹாவீர விக்ரம பஜ3ரங்கீ3 |

குமதி நிவார ஸுமதி கே ஸங்கீ3 ‖3 ‖


கஂசந வரண விராஜ ஸுவேஶா |

காநந குண்ட3ல குஂசித கேஶா ‖ 4 ‖


ஹாத2வஜ்ர ஔ த்4வஜா விராஜை |

காந்தே2 மூஂஜ ஜநேவூ ஸாஜை ‖ 5‖


ஶஂகர ஸுவந கேஸரீ நந்த3ந |

தேஜ ப்ரதாப மஹாஜக3 வந்த3ந ‖ 6 ‖


வித்3யாவாந கு3ணீ அதி சாதுர |

ராம காஜ கரிவே கோ ஆதுர ‖ 7 ‖


ப்ரபு4 சரித்ர ஸுநிவே கோ ரஸியா |

ராமலக2ந ஸீதா மந ப3ஸியா ‖ 8‖


ஸூக்ஷ்ம ரூபத4ரி ஸியஹி தி3கா2வா |

விகட ரூபத4ரி லஂக ஜலாவா ‖ 9 ‖


பீ4ம ரூபத4ரி அஸுர ஸம்ஹாரே |

ராமசந்த்3ர கே காஜ ஸம்வாரே ‖ 1௦ ‖


லாய ஸஂஜீவந லக2ந ஜியாயே |

ஶ்ரீ ரகு4வீர ஹரஷி உரலாயே ‖ 11 ‖


ரகு4பதி கீந்ஹீ ப3ஹுத ப3டா3யீ |

தும மம ப்ரிய ப4ரத ஸம பா4யீ ‖ 12 ‖


ஸஹஸ்ர வத3ந தும்ஹரோ யஶகா3வை |

அஸ கஹி ஶ்ரீபதி கண்ட2 லகா3வை ‖ 13 ‖


ஸநகாதி3க ப்3ரஹ்மாதி3 முநீஶா |

நாரத3 ஶாரத3 ஸஹித அஹீஶா ‖ 14 ‖


யம குபே3ர தி3க3பால ஜஹாம் தே |

கவி கோவித3 கஹி ஸகே கஹாம் தே ‖ 15 ‖


தும உபகார ஸுக்3ரீவஹி கீந்ஹா |

ராம மிலாய ராஜபத3 தீ3ந்ஹா ‖ 16 ‖


தும்ஹரோ மந்த்ர விபீ4ஷண மாநா |

லஂகேஶ்வர ப4யே ஸப3 ஜக3 ஜாநா ‖ 17 ‖


யுக3 ஸஹஸ்ர யோஜந பர பா4நூ |

லீல்யோ தாஹி மது4ர ப2ல ஜாநூ ‖ 18 ‖


ப்ரபு4 முத்3ரிகா மேலி முக2 மாஹீ |

ஜலதி4 லாங்கி4 க3யே அசரஜ நாஹீ ‖ 19 ‖


து3ர்க3ம காஜ ஜக3த கே ஜேதே |

ஸுக3ம அநுக்3ரஹ தும்ஹரே தேதே ‖ 2௦ ‖


ராம து3ஆரே தும ரக2வாரே |

ஹோத ந ஆஜ்ஞா பி3நு பைஸாரே ‖ 21 ‖


ஸப3 ஸுக2 லஹை தும்ஹாரீ ஶரணா |

தும ரக்ஷக காஹூ கோ ட3ர நா ‖ 22 ‖


ஆபந தேஜ ஸம்ஹாரோ ஆபை |

தீநோம் லோக ஹாஂக தே காம்பை ‖ 23 ‖


பூ4த பிஶாச நிகட நஹி ஆவை |

மஹவீர ஜப3 நாம ஸுநாவை ‖ 24 ‖


நாஸை ரோக3 ஹரை ஸப3 பீரா |

ஜபத நிரந்தர ஹநுமத வீரா ‖ 25 ‖


ஸஂகட ஸே ஹநுமாந சு2டா3வை |

மந க்ரம வசந த்4யாந ஜோ லாவை ‖ 26 ‖


ஸப3 பர ராம தபஸ்வீ ராஜா |

திநகே காஜ ஸகல தும ஸாஜா ‖ 27 ‖


ஔர மநோரத4 ஜோ கோயி லாவை |

தாஸு அமித ஜீவந ப2ல பாவை ‖ 28 ‖


சாரோ யுக3 ப்ரதாப தும்ஹாரா |

ஹை ப்ரஸித்3த4 ஜக3த உஜியாரா ‖ 29 ‖


ஸாது4 ஸந்த கே தும ரக2வாரே |

அஸுர நிகந்த3ந ராம து3லாரே ‖ 3௦ ‖


அஷ்ட2ஸித்3தி4 நவ நிதி4 கே தா3தா |

அஸ வர தீ3ந்ஹ ஜாநகீ மாதா ‖ 31 ‖


ராம ரஸாயந தும்ஹாரே பாஸா |

ஸதா3 ரஹோ ரகு4பதி கே தா3ஸா ‖ 32 ‖


தும்ஹரே பஜ4ந ராமகோ பாவை |

ஜந்ம ஜந்ம கே து3க2 பி3ஸராவை ‖ 33 ‖


அந்த கால ரகு4பதி புரஜாயீ |

ஜஹாம் ஜந்ம ஹரிப4க்த கஹாயீ ‖ 34 ‖


ஔர தே3வதா சித்த ந த4ரயீ |

ஹநுமத ஸேயி ஸர்வ ஸுக2 கரயீ ‖ 35 ‖


ஸஂகட க(ஹ)டை மிடை ஸப3 பீரா |

ஜோ ஸுமிரை ஹநுமத ப3ல வீரா ‖ 36 ‖


ஜை ஜை ஜை ஹநுமாந கோ3ஸாயீ |

க்ருபா கரஹு கு3ருதே3வ கீ நாயீ ‖ 37 ‖


ஜோ ஶத வார பாட2 கர கோயீ |

சூ2டஹி ப3ந்தி3 மஹா ஸுக2 ஹோயீ ‖ 38 ‖


ஜோ யஹ படை3 ஹநுமாந சாலீஸா |

ஹோய ஸித்3தி4 ஸாகீ2 கௌ3ரீஶா ‖ 39 ‖


துலஸீதா3ஸ ஸதா3 ஹரி சேரா |

கீஜை நாத2 ஹ்ருத3ய மஹ டே3ரா ‖ 4௦ ‖


தோ3ஹா

பவந தநய ஸஂகட ஹரண - மங்க3ல்த3 மூரதி ரூப் |

ராம லக2ந ஸீதா ஸஹித - ஹ்ருத3ய ப3ஸஹு ஸுரபூ4ப் ‖

ஸியாவர ராமசந்த்3ரகீ ஜய | பவநஸுத ஹநுமாநகீ ஜய | போ3லோ பா4யீ ஸப3 ஸந்தநகீ ஜய |


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Gujarati and It's Meaning


દોહા

શ્રી ગુરુ ચરણ સરોજ રજ નિજમન મુકુર સુધારિ |

વરણૌ રઘુવર વિમલયશ જો દાયક ફલચારિ ‖

બુદ્ધિહીન તનુજાનિકૈ સુમિરૌ પવન કુમાર |

બલ બુદ્ધિ વિદ્યા દેહુ મોહિ હરહુ કલેશ વિકાર ‖


ધ્યાનમ્

ગોષ્પદીકૃત વારાશિં મશકીકૃત રાક્ષસમ્ |

રામાયણ મહામાલા રત્નં વંદે-(અ)નિલાત્મજમ્ ‖

યત્ર યત્ર રઘુનાથ કીર્તનં તત્ર તત્ર કૃતમસ્તકાંજલિમ્ |

ભાષ્પવારિ પરિપૂર્ણ લોચનં મારુતિં નમત રાક્ષસાંતકમ્ ‖


ચૌપાઈ

જય હનુમાન જ્ઞાન ગુણ સાગર |

જય કપીશ તિહુ લોક ઉજાગર ‖ 1 ‖


રામદૂત અતુલિત બલધામા |

અંજનિ પુત્ર પવનસુત નામા ‖ 2 ‖


મહાવીર વિક્રમ બજરંગી |

કુમતિ નિવાર સુમતિ કે સંગી ‖3 ‖


કંચન વરણ વિરાજ સુવેશા |

કાનન કુંડલ કુંચિત કેશા ‖ 4 ‖


હાથવજ્ર ઔ ધ્વજા વિરાજૈ |

કાંથે મૂંજ જનેવૂ સાજૈ ‖ 5‖


શંકર સુવન કેસરી નંદન |

તેજ પ્રતાપ મહાજગ વંદન ‖ 6 ‖


વિદ્યાવાન ગુણી અતિ ચાતુર |

રામ કાજ કરિવે કો આતુર ‖ 7 ‖


પ્રભુ ચરિત્ર સુનિવે કો રસિયા |

રામલખન સીતા મન બસિયા ‖ 8‖


સૂક્ષ્મ રૂપધરિ સિયહિ દિખાવા |

વિકટ રૂપધરિ લંક જલાવા ‖ 9 ‖


ભીમ રૂપધરિ અસુર સંહારે |

રામચંદ્ર કે કાજ સંવારે ‖ 10 ‖


લાય સંજીવન લખન જિયાયે |

શ્રી રઘુવીર હરષિ ઉરલાયે ‖ 11 ‖


રઘુપતિ કીન્હી બહુત બડાયી |

તુમ મમ પ્રિય ભરત સમ ભાયી ‖ 12 ‖


સહસ્ર વદન તુમ્હરો યશગાવૈ |

અસ કહિ શ્રીપતિ કંઠ લગાવૈ ‖ 13 ‖


સનકાદિક બ્રહ્માદિ મુનીશા |

નારદ શારદ સહિત અહીશા ‖ 14 ‖


યમ કુબેર દિગપાલ જહાં તે |

કવિ કોવિદ કહિ સકે કહાં તે ‖ 15 ‖


તુમ ઉપકાર સુગ્રીવહિ કીન્હા |

રામ મિલાય રાજપદ દીન્હા ‖ 16 ‖


તુમ્હરો મંત્ર વિભીષણ માના |

લંકેશ્વર ભયે સબ જગ જાના ‖ 17 ‖


યુગ સહસ્ર યોજન પર ભાનૂ |

લીલ્યો તાહિ મધુર ફલ જાનૂ ‖ 18 ‖


પ્રભુ મુદ્રિકા મેલિ મુખ માહી |

જલધિ લાંઘિ ગયે અચરજ નાહી ‖ 19 ‖


દુર્ગમ કાજ જગત કે જેતે |

સુગમ અનુગ્રહ તુમ્હરે તેતે ‖ 20 ‖


રામ દુઆરે તુમ રખવારે |

હોત ન આજ્ઞા બિનુ પૈસારે ‖ 21 ‖


સબ સુખ લહૈ તુમ્હારી શરણા |

તુમ રક્ષક કાહૂ કો ડર ના ‖ 22 ‖


આપન તેજ સમ્હારો આપૈ |

તીનોં લોક હાંક તે કાંપૈ ‖ 23 ‖


ભૂત પિશાચ નિકટ નહિ આવૈ |

મહવીર જબ નામ સુનાવૈ ‖ 24 ‖


નાસૈ રોગ હરૈ સબ પીરા |

જપત નિરંતર હનુમત વીરા ‖ 25 ‖


સંકટ સે હનુમાન છુડાવૈ |

મન ક્રમ વચન ધ્યાન જો લાવૈ ‖ 26 ‖


સબ પર રામ તપસ્વી રાજા |

તિનકે કાજ સકલ તુમ સાજા ‖ 27 ‖


ઔર મનોરધ જો કોયિ લાવૈ |

તાસુ અમિત જીવન ફલ પાવૈ ‖ 28 ‖


ચારો યુગ પ્રતાપ તુમ્હારા |

હૈ પ્રસિદ્ધ જગત ઉજિયારા ‖ 29 ‖


સાધુ સંત કે તુમ રખવારે |

અસુર નિકંદન રામ દુલારે ‖ 30 ‖


અષ્ઠસિદ્ધિ નવ નિધિ કે દાતા |

અસ વર દીન્હ જાનકી માતા ‖ 31 ‖


રામ રસાયન તુમ્હારે પાસા |

સદા રહો રઘુપતિ કે દાસા ‖ 32 ‖


તુમ્હરે ભજન રામકો પાવૈ |

જન્મ જન્મ કે દુખ બિસરાવૈ ‖ 33 ‖


અંત કાલ રઘુપતિ પુરજાયી |

જહાં જન્મ હરિભક્ત કહાયી ‖ 34 ‖


ઔર દેવતા ચિત્ત ન ધરયી |

હનુમત સેયિ સર્વ સુખ કરયી ‖ 35 ‖


સંકટ ક(હ)ટૈ મિટૈ સબ પીરા |

જો સુમિરૈ હનુમત બલ વીરા ‖ 36 ‖


જૈ જૈ જૈ હનુમાન ગોસાયી |

કૃપા કરહુ ગુરુદેવ કી નાયી ‖ 37 ‖


જો શત વાર પાઠ કર કોયી |

છૂટહિ બંદિ મહા સુખ હોયી ‖ 38 ‖


જો યહ પડૈ હનુમાન ચાલીસા |

હોય સિદ્ધિ સાખી ગૌરીશા ‖ 39 ‖


તુલસીદાસ સદા હરિ ચેરા |

કીજૈ નાથ હૃદય મહ ડેરા ‖ 40 ‖


દોહા

પવન તનય સંકટ હરણ - મંગળ મૂરતિ રૂપ્ |

રામ લખન સીતા સહિત - હૃદય બસહુ સુરભૂપ્ ‖

સિયાવર રામચંદ્રકી જય | પવનસુત હનુમાનકી જય | બોલો ભાયી સબ સંતનકી જય |


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Bengali and It's Meaning


দোহা

শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি |

বরণৌ রঘুবর বিমলযশ জো দাযক ফলচারি ‖

বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার |

বল বুদ্ধি বিদ্যা দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার ‖


ধ্যানম্

গোষ্পদীকৃত বারাশিং মশকীকৃত রাক্ষসম্ |

রামাযণ মহামালা রত্নং বংদে-(অ)নিলাত্মজম্ ‖

যত্র যত্র রঘুনাথ কীর্তনং তত্র তত্র কৃতমস্তকাংজলিম্ |

ভাষ্পবারি পরিপূর্ণ লোচনং মারুতিং নমত রাক্ষসাংতকম্ ‖


চৌপাঈ

জয হনুমান জ্ঞান গুণ সাগর |

জয কপীশ তিহু লোক উজাগর ‖ 1 ‖


রামদূত অতুলিত বলধামা |

অংজনি পুত্র পবনসুত নামা ‖ 2 ‖


মহাবীর বিক্রম বজরংগী |

কুমতি নিবার সুমতি কে সংগী ‖3 ‖


কংচন বরণ বিরাজ সুবেশা |

কানন কুংডল কুংচিত কেশা ‖ 4 ‖


হাথবজ্র ঔ ধ্বজা বিরাজৈ |

কাংথে মূংজ জনেবূ সাজৈ ‖ 5‖


শংকর সুবন কেসরী নংদন |

তেজ প্রতাপ মহাজগ বংদন ‖ 6 ‖


বিদ্যাবান গুণী অতি চাতুর |

রাম কাজ করিবে কো আতুর ‖ 7 ‖


প্রভু চরিত্র সুনিবে কো রসিযা |

রামলখন সীতা মন বসিযা ‖ 8‖


সূক্ষ্ম রূপধরি সিযহি দিখাবা |

বিকট রূপধরি লংক জলাবা ‖ 9 ‖


ভীম রূপধরি অসুর সংহারে |

রামচংদ্র কে কাজ সংবারে ‖ 10 ‖


লায সংজীবন লখন জিযাযে |

শ্রী রঘুবীর হরষি উরলাযে ‖ 11 ‖


রঘুপতি কীন্হী বহুত বডাযী |

তুম মম প্রিয ভরত সম ভাযী ‖ 12 ‖


সহস্র বদন তুম্হরো যশগাবৈ |

অস কহি শ্রীপতি কংঠ লগাবৈ ‖ 13 ‖


সনকাদিক ব্রহ্মাদি মুনীশা |

নারদ শারদ সহিত অহীশা ‖ 14 ‖


যম কুবের দিগপাল জহাং তে |

কবি কোবিদ কহি সকে কহাং তে ‖ 15 ‖


তুম উপকার সুগ্রীবহি কীন্হা |

রাম মিলায রাজপদ দীন্হা ‖ 16 ‖


তুম্হরো মংত্র বিভীষণ মানা |

লংকেশ্বর ভযে সব জগ জানা ‖ 17 ‖


যুগ সহস্র যোজন পর ভানূ |

লীল্যো তাহি মধুর ফল জানূ ‖ 18 ‖


প্রভু মুদ্রিকা মেলি মুখ মাহী |

জলধি লাংঘি গযে অচরজ নাহী ‖ 19 ‖


দুর্গম কাজ জগত কে জেতে |

সুগম অনুগ্রহ তুম্হরে তেতে ‖ 20 ‖


রাম দুআরে তুম রখবারে |

হোত ন আজ্ঞা বিনু পৈসারে ‖ 21 ‖


সব সুখ লহৈ তুম্হারী শরণা |

তুম রক্ষক কাহূ কো ডর না ‖ 22 ‖


আপন তেজ সম্হারো আপৈ |

তীনোং লোক হাংক তে কাংপৈ ‖ 23 ‖


ভূত পিশাচ নিকট নহি আবৈ |

মহবীর জব নাম সুনাবৈ ‖ 24 ‖


নাসৈ রোগ হরৈ সব পীরা |

জপত নিরংতর হনুমত বীরা ‖ 25 ‖


সংকট সে হনুমান ছুডাবৈ |

মন ক্রম বচন ধ্যান জো লাবৈ ‖ 26 ‖


সব পর রাম তপস্বী রাজা |

তিনকে কাজ সকল তুম সাজা ‖ 27 ‖


ঔর মনোরধ জো কোযি লাবৈ |

তাসু অমিত জীবন ফল পাবৈ ‖ 28 ‖


চারো যুগ প্রতাপ তুম্হারা |

হৈ প্রসিদ্ধ জগত উজিযারা ‖ 29 ‖


সাধু সংত কে তুম রখবারে |

অসুর নিকংদন রাম দুলারে ‖ 30 ‖


অষ্ঠসিদ্ধি নব নিধি কে দাতা |

অস বর দীন্হ জানকী মাতা ‖ 31 ‖


রাম রসাযন তুম্হারে পাসা |

সদা রহো রঘুপতি কে দাসা ‖ 32 ‖


তুম্হরে ভজন রামকো পাবৈ |

জন্ম জন্ম কে দুখ বিসরাবৈ ‖ 33 ‖


অংত কাল রঘুপতি পুরজাযী |

জহাং জন্ম হরিভক্ত কহাযী ‖ 34 ‖


ঔর দেবতা চিত্ত ন ধরযী |

হনুমত সেযি সর্ব সুখ করযী ‖ 35 ‖


সংকট ক(হ)টৈ মিটৈ সব পীরা |

জো সুমিরৈ হনুমত বল বীরা ‖ 36 ‖


জৈ জৈ জৈ হনুমান গোসাযী |

কৃপা করহু গুরুদেব কী নাযী ‖ 37 ‖


জো শত বার পাঠ কর কোযী |

ছূটহি বংদি মহা সুখ হোযী ‖ 38 ‖


জো যহ পডৈ হনুমান চালীসা |

হোয সিদ্ধি সাখী গৌরীশা ‖ 39 ‖


তুলসীদাস সদা হরি চেরা |

কীজৈ নাথ হৃদয মহ ডেরা ‖ 40 ‖


দোহা

পবন তনয সংকট হরণ - মংগ঳ মূরতি রূপ্ |

রাম লখন সীতা সহিত - হৃদয বসহু সুরভূপ্ ‖

সিযাবর রামচংদ্রকী জয | পবনসুত হনুমানকী জয | বোলো ভাযী সব সংতনকী জয |


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श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स-Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Malyalam and It's Meaning


ദോഹാ

ശ്രീ ഗുരു ചരണ സരോജ രജ നിജമന മുകുര സുധാരി |

വരണൌ രഘുവര വിമലയശ ജോ ദായക ഫലചാരി ‖

ബുദ്ധിഹീന തനുജാനികൈ സുമിരൌ പവന കുമാര |

ബല ബുദ്ധി വിദ്യാ ദേഹു മോഹി ഹരഹു കലേശ വികാര ‖


ധ്യാനമ്

ഗോഷ്പദീകൃത വാരാശിം മശകീകൃത രാക്ഷസമ് |

രാമായണ മഹാമാലാ രത്നം വംദേ-(അ)നിലാത്മജമ് ‖

യത്ര യത്ര രഘുനാഥ കീര്തനം തത്ര തത്ര കൃതമസ്തകാംജലിമ് |

ഭാഷ്പവാരി പരിപൂര്ണ ലോചനം മാരുതിം നമത രാക്ഷസാംതകമ് ‖


ചൌപാഈ

ജയ ഹനുമാന ജ്ഞാന ഗുണ സാഗര |

ജയ കപീശ തിഹു ലോക ഉജാഗര ‖ 1 ‖


രാമദൂത അതുലിത ബലധാമാ |

അംജനി പുത്ര പവനസുത നാമാ ‖ 2 ‖


മഹാവീര വിക്രമ ബജരംഗീ |

കുമതി നിവാര സുമതി കേ സംഗീ ‖3 ‖


കംചന വരണ വിരാജ സുവേശാ |

കാനന കുംഡല കുംചിത കേശാ ‖ 4 ‖


ഹാഥവജ്ര ഔ ധ്വജാ വിരാജൈ |

കാംഥേ മൂംജ ജനേവൂ സാജൈ ‖ 5‖


ശംകര സുവന കേസരീ നംദന |

തേജ പ്രതാപ മഹാജഗ വംദന ‖ 6 ‖


വിദ്യാവാന ഗുണീ അതി ചാതുര |

രാമ കാജ കരിവേ കോ ആതുര ‖ 7 ‖


പ്രഭു ചരിത്ര സുനിവേ കോ രസിയാ |

രാമലഖന സീതാ മന ബസിയാ ‖ 8‖


സൂക്ഷ്മ രൂപധരി സിയഹി ദിഖാവാ |

വികട രൂപധരി ലംക ജലാവാ ‖ 9 ‖


ഭീമ രൂപധരി അസുര സംഹാരേ |

രാമചംദ്ര കേ കാജ സംവാരേ ‖ 10 ‖


ലായ സംജീവന ലഖന ജിയായേ |

ശ്രീ രഘുവീര ഹരഷി ഉരലായേ ‖ 11 ‖


രഘുപതി കീന്ഹീ ബഹുത ബഡായീ |

തുമ മമ പ്രിയ ഭരത സമ ഭായീ ‖ 12 ‖


സഹസ്ര വദന തുമ്ഹരോ യശഗാവൈ |

അസ കഹി ശ്രീപതി കംഠ ലഗാവൈ ‖ 13 ‖


സനകാദിക ബ്രഹ്മാദി മുനീശാ |

നാരദ ശാരദ സഹിത അഹീശാ ‖ 14 ‖


യമ കുബേര ദിഗപാല ജഹാം തേ |

കവി കോവിദ കഹി സകേ കഹാം തേ ‖ 15 ‖


തുമ ഉപകാര സുഗ്രീവഹി കീന്ഹാ |

രാമ മിലായ രാജപദ ദീന്ഹാ ‖ 16 ‖


തുമ്ഹരോ മംത്ര വിഭീഷണ മാനാ |

ലംകേശ്വര ഭയേ സബ ജഗ ജാനാ ‖ 17 ‖


യുഗ സഹസ്ര യോജന പര ഭാനൂ |

ലീല്യോ താഹി മധുര ഫല ജാനൂ ‖ 18 ‖


പ്രഭു മുദ്രികാ മേലി മുഖ മാഹീ |

ജലധി ലാംഘി ഗയേ അചരജ നാഹീ ‖ 19 ‖


ദുര്ഗമ കാജ ജഗത കേ ജേതേ |

സുഗമ അനുഗ്രഹ തുമ്ഹരേ തേതേ ‖ 20 ‖


രാമ ദുആരേ തുമ രഖവാരേ |

ഹോത ന ആജ്ഞാ ബിനു പൈസാരേ ‖ 21 ‖


സബ സുഖ ലഹൈ തുമ്ഹാരീ ശരണാ |

തുമ രക്ഷക കാഹൂ കോ ഡര നാ ‖ 22 ‖


ആപന തേജ സമ്ഹാരോ ആപൈ |

തീനോം ലോക ഹാംക തേ കാംപൈ ‖ 23 ‖


ഭൂത പിശാച നികട നഹി ആവൈ |

മഹവീര ജബ നാമ സുനാവൈ ‖ 24 ‖


നാസൈ രോഗ ഹരൈ സബ പീരാ |

ജപത നിരംതര ഹനുമത വീരാ ‖ 25 ‖


സംകട സേ ഹനുമാന ഛുഡാവൈ |

മന ക്രമ വചന ധ്യാന ജോ ലാവൈ ‖ 26 ‖


സബ പര രാമ തപസ്വീ രാജാ |

തിനകേ കാജ സകല തുമ സാജാ ‖ 27 ‖


ഔര മനോരധ ജോ കോയി ലാവൈ |

താസു അമിത ജീവന ഫല പാവൈ ‖ 28 ‖


ചാരോ യുഗ പ്രതാപ തുമ്ഹാരാ |

ഹൈ പ്രസിദ്ധ ജഗത ഉജിയാരാ ‖ 29 ‖


സാധു സംത കേ തുമ രഖവാരേ |

അസുര നികംദന രാമ ദുലാരേ ‖ 30 ‖


അഷ്ഠസിദ്ധി നവ നിധി കേ ദാതാ |

അസ വര ദീന്ഹ ജാനകീ മാതാ ‖ 31 ‖


രാമ രസായന തുമ്ഹാരേ പാസാ |

സദാ രഹോ രഘുപതി കേ ദാസാ ‖ 32 ‖


തുമ്ഹരേ ഭജന രാമകോ പാവൈ |

ജന്മ ജന്മ കേ ദുഖ ബിസരാവൈ ‖ 33 ‖


അംത കാല രഘുപതി പുരജായീ |

ജഹാം ജന്മ ഹരിഭക്ത കഹായീ ‖ 34 ‖


ഔര ദേവതാ ചിത്ത ന ധരയീ |

ഹനുമത സേയി സര്വ സുഖ കരയീ ‖ 35 ‖


സംകട ക(ഹ)ടൈ മിടൈ സബ പീരാ |

ജോ സുമിരൈ ഹനുമത ബല വീരാ ‖ 36 ‖


ജൈ ജൈ ജൈ ഹനുമാന ഗോസായീ |

കൃപാ കരഹു ഗുരുദേവ കീ നായീ ‖ 37 ‖


ജോ ശത വാര പാഠ കര കോയീ |

ഛൂടഹി ബംദി മഹാ സുഖ ഹോയീ ‖ 38 ‖


ജോ യഹ പഡൈ ഹനുമാന ചാലീസാ |

ഹോയ സിദ്ധി സാഖീ ഗൌരീശാ ‖ 39 ‖


തുലസീദാസ സദാ ഹരി ചേരാ |

കീജൈ നാഥ ഹൃദയ മഹ ഡേരാ ‖ 40 ‖


ദോഹാ

പവന തനയ സംകട ഹരണ - മംഗള മൂരതി രൂപ് |

രാമ ലഖന സീതാ സഹിത - ഹൃദയ ബസഹു സുരഭൂപ് ‖

സിയാവര രാമചംദ്രകീ ജയ | പവനസുത ഹനുമാനകീ ജയ | ബോലോ ഭായീ സബ സംതനകീ ജയ |


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